कलश यात्रा के साथ शुरू हुआ छठवां अश्वमेघ महायज्ञ
बड़हलगंज : अंतर्राष्ट्रीय मातेश्वरी महाधाम दोहरीघाट में आयोजित दस दिवसीय छठवें अश्वमेघ महायज्ञ के पहले दिन शुक्रवार को भव्य कलश यात्रा निकाली गई। जिसमें कस्बे तथा आस-पास गांवों से श्रद्वालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
महाधाम से सुबह दस बजे शुरू हुई कलश यात्रा दोहरीघाट कस्बा होते हुए सरयू पुल को पार कर बड़हलगंज कस्बे के पटना चौराहे पर पहुंची। उसके बाद जामा मस्जिद, सोती चौराहा, होते हुए गोला तिराहा पर पहुंची। वहां से कालेज रोड होते हुए मुक्तिपथ रामकवल शाही घाट पर पहुंची। जहां यात्रा में शामिल पीत वस्त्रधारी महिलाएं, पुरूष, बालिकाओं ने अपने हाथों मे लिए कलश में मंत्रोचारण के बीच जल भरा। जलग्रहण के उपरांत यात्रा पुन: महाधाम स्थित यज्ञस्थल पहुंची। जिसके बाद विधिविधान से कलश स्थापित किया गया। कलश यात्रा में देवरिया, आजमगढ़, बस्ती, मऊ सहित दूरदराज के श्रद्वालु भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। यात्रा की अगुआनी घोड़े, सिंहा, नगाड़ा, तुरही आदि कर रहे थे। यात्रा में शामिल विद्वानों के ध्वनिविस्तारक यंत्रों पर उच्चारित वेदमंत्रों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो रहा था। यात्रा के दौरान निकली झाकी आकर्षण का केंद्र रही। कलश यात्रा का नेतृत्व सद्गुरु महाराज ने किया। आचार्य सूर्यभान पांडेय ने बताया कि महायज्ञ 21 फरवरी से शुरू होकर 1 मार्च तक चलेगा। वहीं 28 फरवरी की शाम मां सरयू की महाआरती की जाएगी।
कलश यात्रा के साथ शुरू हुआ छठवां अश्वमेघ महायज्ञ
बड़हलगंज : अंतर्राष्ट्रीय मातेश्वरी महाधाम दोहरीघाट में आयोजित दस दिवसीय छठवें अश्वमेघ महायज्ञ के पहले दिन शुक्रवार को भव्य कलश यात्रा निकाली गई। जिसमें कस्बे तथा आस-पास गांवों से श्रद्वालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
महाधाम से सुबह दस बजे शुरू हुई कलश यात्रा दोहरीघाट कस्बा होते हुए सरयू पुल को पार कर बड़हलगंज कस्बे के पटना चौराहे पर पहुंची। उसके बाद जामा मस्जिद, सोती चौराहा, होते हुए गोला तिराहा पर पहुंची। वहां से कालेज रोड होते हुए मुक्तिपथ रामकवल शाही घाट पर पहुंची। जहां यात्रा में शामिल पीत वस्त्रधारी महिलाएं, पुरूष, बालिकाओं ने अपने हाथों मे लिए कलश में मंत्रोचारण के बीच जल भरा। जलग्रहण के उपरांत यात्रा पुन: महाधाम स्थित यज्ञस्थल पहुंची। जिसके बाद विधिविधान से कलश स्थापित किया गया। कलश यात्रा में देवरिया, आजमगढ़, बस्ती, मऊ सहित दूरदराज के श्रद्वालु भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। यात्रा की अगुआनी घोड़े, सिंहा, नगाड़ा, तुरही आदि कर रहे थे। यात्रा में शामिल विद्वानों के ध्वनिविस्तारक यंत्रों पर उच्चारित वेदमंत्रों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो रहा था। यात्रा के दौरान निकली झाकी आकर्षण का केंद्र रही। कलश यात्रा का नेतृत्व सद्गुरु महाराज ने किया। आचार्य सूर्यभान पांडेय ने बताया कि महायज्ञ 21 फरवरी से शुरू होकर 1 मार्च तक चलेगा। वहीं 28 फरवरी की शाम मां सरयू की महाआरती की जाएगी।