*ब्रेन हेमरेज से जूझ रहे अनिल कुमार राम की मदद को आगे आए जिला पंचायत सदस्य आलोक गुप्ता*
*मानव शिक्षा सेवा संस्थान ने बीस हजार रुपये की आर्थिक सहायता देकर दिखाई संवेदनशीलता*
बैदौली खुर्द, बड़हलगंज (गोरखपुर):
एक ओर जहां समाज में अक्सर समस्याओं को लेकर उदासीनता देखी जाती है, वहीं दूसरी ओर मानव शिक्षा सेवा संस्थान ने सामाजिक सेवा और मानवीय मूल्यों की एक जीवंत मिसाल प्रस्तुत की है। गोरखपुर के बड़हलगंज ब्लॉक स्थित बैदौली खुर्द गांव में ब्रेन हेमरेज से पीड़ित अनिल कुमार राम (50 वर्ष) की मदद के लिए वार्ड नंबर 46 के जिला पंचायत सदस्य और संस्थान के प्रबंधक आलोक गुप्ता ने तत्परता दिखाते हुए बीस हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की।बीते कुछ दिनों से गंभीर रूप से बीमार अनिल कुमार राम गोरखपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं। उनके पास इलाज के लिए जरूरी धनराशि का अभाव था। जैसे ही यह जानकारी संस्थान की सक्रिय सदस्य संगीता देवी एवं गांव के कुछ जागरूक नागरिकों द्वारा आलोक गुप्ता तक पहुंचाई गई, उन्होंने तत्काल कोई विलंब किए बिना गांव पहुंचकर पीड़ित के वृद्ध माता-पिता को चेक सौंपा।
अनिल राम के पिता धनपाल राम, जिनकी उम्र लगभग 80 वर्ष है और जो स्वयं हृदय रोगी हैं, उन्हें आलोक गुप्ता ने यह आर्थिक सहायता दी। इस सहायता से अनिल के इलाज में दवा और जरूरी जांचों का कार्य हो सकेगा। आलोक गुप्ता ने कहा, “हमारी पहली प्राथमिकता संकट में घिरे परिवारों तक बिना देर किए सहायता पहुंचाना है।
अनिल कुमार राम का पूरा परिवार उन्हीं पर निर्भर था। उनकी पत्नी, वृद्ध माता-पिता और तीन संतानें—बड़ी बेटी खुशी (18 वर्ष), छोटी बेटी साक्षी (15 वर्ष) और बेटा आर्यन (10 वर्ष)—घर की माली हालत को लेकर बेहद चिंतित हैं। ब्रेन हेमरेज के बाद बीते नौ-दस दिनों से अनिल कुमार कोमा में हैं और इलाज का खर्च दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। गांव के लोगों ने शुरुआत में मिलकर कुछ आर्थिक सहायता जरूर की, लेकिन अब अस्पताल के खर्च के आगे परिवार बिल्कुल असहाय हो गया है।
इस गंभीर स्थिति में मानव शिक्षा सेवा संस्थान ने एक बार फिर दिखा दिया कि वह सिर्फ नाम का नहीं, बल्कि कर्म का संगठन है। इस सहायता कार्य में संस्था के अन्य सदस्य—ज्ञानमती, अफसार, विज़न, राजमती, राजू और सुरेश मास्टर—भी सक्रिय रूप से उपस्थित रहे। संस्था का यह कार्य केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि मानवता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने इस सेवा कार्य के प्रति न केवल समर्थन जताया, बल्कि आलोक गुप्ता और उनकी टीम की खुलकर प्रशंसा की। उपस्थित लोगों ने संस्थान के कार्यकर्ताओं को आशीर्वाद देते हुए कहा कि ऐसी संस्थाएं और ऐसे जनप्रतिनिधि ही वास्तव में समाज की रीढ़ होते हैं।
इस मौके पर संस्थान की अध्यक्ष प्रिया गुप्ता ने भी उपस्थित होकर सभी को संबोधित किया। उन्होंने कहा, “हमारा संस्थान जनता से है, जनता के लिए है और जनता के बीच ही है। ऐसे संकट में यदि हम एक-दूसरे का सहारा न बनें, तो मानवता का अर्थ ही अधूरा रह जाता है।”
उन्होंने अन्य सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों और संभ्रांत नागरिकों से अपील की कि वे ऐसे परिवारों के लिए आगे आएं और उन्हें सहारा देने का पुण्य कार्य करें।
यह घटना केवल एक परिवार की मदद नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है। जब एक संगठन और उसके जिम्मेदार प्रतिनिधि बिना भेदभाव और विलंब के जरूरतमंद की सहायता को पहुंचते हैं, तो न सिर्फ पीड़ित परिवार को संबल मिलता है, बल्कि पूरे क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा और सामाजिक जागरूकता का संचार होता है।मानव शिक्षा सेवा संस्थान ने फिर यह दिखा दिया कि सामाजिक सेवा केवल भाषणों तक सीमित नहीं, बल्कि कर्तव्य और संवेदना की क्रियाशीलता में उसकी असली पहचान है। आलोक गुप्ता और उनकी टीम ने यह उदाहरण पेश किया है कि अगर इच्छाशक्ति और सेवा भाव हो, तो संसाधनों की कमी भी बाधा नहीं बन सकता है।