June 4, 2026
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वृंदावन में “दिव्यालय – एक साहित्यिक यात्रा” का भव्य आयोजन सम्पन्न

 

मुख्य वक्ता सौहार्द शिरोमणि संत डॉ. सौरभ पाण्डेय एवं मुख्य अतिथि के रूप में श्वेतिमा माधव प्रिया की विशेष उपस्थिति

 

 

 

गोरखपुर

 

“दिव्यालय – एक साहित्यिक यात्रा” द्वारा वृंदावन की पवित्र भूमि पर एक दिवसीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक महाकुंभ का आयोजन अत्यंत भव्यता एवं आध्यात्मिकता के वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में सौहार्द शिरोमणि संत डॉ. सौरभ पाण्डेय की प्रेरणादायक उपस्थिति रही, जिन्होंने अपने संबोधन में साहित्य, संस्कार और धर्म के त्रिवेणी संगम को युगधर्म बताया।

 

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि थीं — केवल 8 वर्ष की आयु में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी आध्यात्मिक कथाओं से पहचान बना चुकीं बाल व्यास श्वेतिमा माधव प्रिया, जिन्हें मंच पर सम्मानित किया गया। उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम को भावात्मक गहराई और विशेष गरिमा प्रदान की।

 

इस अवसर पर दिव्यालय की संस्थापिका व्यंजना आनंद ‘मिथ्या’ को “श्रेष्ठ नारी सम्मान” से सम्मानित किया गया।

शिवप्रकाश ‘साहित्य’ को “श्रेष्ठ संचालक सम्मान” प्राप्त हुआ।

अर्पणा पोद्दार ‘शैलजा’, मनीषा अग्रवाल ‘रक्स’, निशा अतुल्य, सुचिता रूंगटा ‘साई’, मधु रूंगटा ‘भव्या’, ललिता अग्रवाल ‘आशना’ समेत अनेक साहित्य साधकों को विभिन्न सम्मान प्रदान किए गए।

 

कार्यक्रम में विशिष्ट रूप से  विनोद बंसल (राष्ट्रीय प्रवक्ता, विश्व हिंदू परिषद), प्रख्यात प्रेरक वक्ता अजय भल्ला, मलूक  पीठाधीश्वर के  विशेष कृपापात्र आचार्य आलोक पाण्डेय, पी यन पाण्डेय  वरिष्ठ पत्रकार,देहदानी डा रागिनी पाण्डेय,तथा अनेक साहित्यकारों, कवियों, और नृत्य प्रस्तुतिकर्ताओं की उपस्थिति रही।

 

विशेष आकर्षण के रूप में एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान पाने वाले “दिव्य दोहावली” का सम्मान संत डॉ. सौरभ पाण्डेय जी के कर-कमलों द्वारा संपन्न हुआ।

नीलम अग्रवाल, कमलेश गर्ग, सुशीला फरमानिया, हेमा जलान, तथा पुष्पा लोहिया को इस गौरव से अलंकृत किया गया।

पुस्तक एवं स्मारिका विमोचन सत्र में – “काव्य तरंगिनी”, “काव्य मधुवन”, “भारत की जनजातियाँ”, “उषा की पहली किरण” जैसी साहित्यिक कृतियाँ विमोचित की गईं।

 

कार्यक्रम का सफल संचालन निशा अतुल्य, मधु रूंगटा एवं कविता पोद्दार ‘कैवल्य’ द्वारा किया गया।

 

धन्यवाद ज्ञापन संस्थापिका व्यंजना आनंद द्वारा भावपूर्ण शब्दों में अर्पित किया गया।

 

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